ककनमठ मंदिर
आश्चर्यचकित करने वाला है इस मंदिर का रहस्य, लटकते पत्थरों से हुआ निर्माण, देखने वाले रह जाते हैं दंग , कहते हैं भूतों ने एक रात में बनाया था ये शिव मंदिर ,रात में यहां कोई नहीं रुकता,डरावने दृश्य दिखाई देते हैं,खौफ और दहशत है लोगो में इस मंदिर के प्रति,अधूरा रह गया क्योंकि सुबह हो गई और भूत निर्माण अधूरा छोड़ कर चले गए मंदिर का हर पत्थर लटक रहा है मु&स्लिम शासकों ने इसे तोड़ने के लिए अथक प्रयास किया, लेकिन ग्वालियर चंबल अंचल के बीहड़ों में बना सिहोनिया(सिंण्यपथ) का ककनमठ मंदिर आज भी खड़ा है ककनमठ मंदिर का इतिहास करीब एक हज़ार साल हजार पुराना है. बेजोड़ स्थापत्य कला का उदाहरण ये मंदिर पत्थरों को एक दूसरे से सटा कर बनाया गया है. मंदिर का संतुलन पत्थरों पर इस तरह बना है कि बड़े-बड़े तूफान और आंधी भी इसे हिला नहीं पाई. कुछ लोग यह मानते हैं कि कोई चमत्कारिक अदृश्य शक्ति है जो मंदिर की रक्षा करती है. इस मंदिर के बीचोंबीच शिवलिंग स्थापित है. 120 फीट ऊंचे इस मंदिर का उपरी सिरा और गर्भ गृह सैकड़ो साल बाद भी सुरक्षित है.इस मंदिर को देखने में लगता है कि यह कभी भी गिर सकता है.. लेकिन ककनमठ मंदिर सैकडों सालों से इसी तरह टिका हुआ है यह एक अदभुत करिश्मा है. इसकी एक और ये विशेषता है..कि इस मंदिर के आस पास के सभी मंदिर टूट गए हैं , लेकिन ककनमठ मंदिर आज भी सुरक्षित है. मंदिर की दीवारों पर देवी-देवताओं की सुंदर प्रतिमायें पर्यटकों को आकर्षित करती है मंदिर अपनी मूर्तिकला संपदा के लिए उल्लेखनीय है। एक ऊंचे अलंकृत पीठ पर खड़ा है और मूल रूप से सहायक मंदिरों से घिरा हुआ है, मंदिर में योजना के अनुसार एक गर्भगृह है जो तीन गूढ़मंडप और सीढ़ियों से पूर्व की ओर जाने वाले एक मुखमंडप से घिरा हुआ है। अंतराल में चार स्तंभों की एक अनुप्रस्थ पंक्ति है, जबकि गूढ़मंडप में चार समूह हैं, प्रत्येक में चार स्तंभ हैं,। गर्भगृह के द्वार में सात शाखाएं हैं जिनमें दो मिथुनसखाओं के बीच बड़ी संख्या में देवता शामिल हैं। शिखर, इसके अधिकांश सजावटी आवरण वाले पत्थरों से कटा हुआ, लगभग 30 मीटर ऊंचा है। मंडप की छत में से केवल उसके मध्य भाग की ऊपरी मंजिल ही बची है मंदिर परिसर अपने भव्य आयाम के साथ-साथ समृद्ध गुणवत्ता और मूर्तियों की विविधता उल्लेखित है न दरवाजे ना खिड़की सिर्फ पत्थर के ऊपर पत्थर रखकर बना मंदिर. देखने में भयभीत करने वाला. कभी भी गिरने का डर लेकिन सदियां गुजर गई आज तक नहीं गिरा. मंदिर के बारे में सच क्या है. पता नहीं, मगर बड़े बुजुर्ग कहते हैं, कि इस मंदिर का निर्माण रातों रात भूतो द्वारा किया गया है. अब ये कहानी है या हकीकत, लेकिन जो भी है बहुत अद्भुत है. एक कथा यह भी है की कच्छवाहा वंश के राजा कीर्तिसिंह की पत्नी ककनावती भगवान शिव की भक्त थी | अपनी पत्नी के लिए राजा कीर्तिसिंह ने 1015 से 1035 के बीच मंदिर का निर्माण किया है | इसीलिए इस मंदिर को ककनमठ के नाम से जाना जाता है |
