
🌺 हरतालिका तीज आज, सुहाग और अखंड दांपत्य सुख की कामना के लिए महिलाएं रखेंगी व्रत
जौनपुर। हरतालिका तीज हिंदू धर्म में महिलाओं के प्रमुख व्रत-पर्वों में से एक है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के अटूट प्रेम, समर्पण और दांपत्य जीवन की पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से यह व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं मनचाहे एवं योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए व्रत एवं पूजा करती हैं।14 सितंबर 2026, सोमवार को हरतालिका तीज मनाई जाएगी।
यह भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पड़ती है। उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में प्रातःकाल भगवान शिव-पार्वती की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
🌺 भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का पर्वपौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी सखी उन्हें वन में सुरक्षित स्थान पर ले गई थीं।
इसी प्रसंग से इस व्रत का नाम हरतालिका पड़ा—‘हरत’ अर्थात हरण करना और ‘आलिका’ अर्थात सखी।मान्यता है कि माता पार्वती की भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। इसलिए इस दिन शिव-पार्वती की पूजा कर दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और सौहार्द की कामना की जाती है।
🪔 निर्जला व्रत और विशेष पूजा की परंपराहरतालिका तीज पर कई महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। व्रती महिलाएं स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान शिव एवं माता पार्वती की पूजा करती हैं।
कई स्थानों पर महिलाएं सोलह श्रृंगार कर मिट्टी से बनाए गए शिव-पार्वती के स्वरूप की भी पूजा करती हैं।पूजा में भगवान शिव-पार्वती एवं गणेश जी का पूजन, कलश स्थापना, रोली, अक्षत, पुष्प, माला, बेलपत्र, धतूरा, श्रृंगार सामग्री, फल-मिष्ठान, दीपक और धूप आदि का प्रयोग किया जाता है। पूजा के दौरान हरतालिका तीज की कथा सुनने और शिव-पार्वती की आरती करने की भी परंपरा है।
📖 व्रत कथा में श्रद्धा और समर्पण का संदेशहरतालिका तीज की कथा में माता पार्वती द्वारा भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए किए गए कठोर तप, उनकी सखी द्वारा उन्हें वन में ले जाने और अंततः भगवान शिव द्वारा उन्हें स्वीकार किए जाने का वर्णन मिलता है।कथा का मुख्य संदेश अटूट श्रद्धा, संकल्प, तपस्या, प्रेम और समर्पण से जुड़ा है।
🌿 मेहंदी और सोलह श्रृंगार से सजेगा पर्वहरतालिका तीज धार्मिक आस्था के साथ भारतीय नारी की सांस्कृतिक परंपराओं से भी जुड़ा पर्व है। महिलाएं हाथों में मेहंदी लगाती हैं और नई साड़ी या पारंपरिक परिधान पहनकर चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, मंगलसूत्र, पायल आदि से श्रृंगार करती हैं। कई क्षेत्रों में महिलाएं समूह में तीज गीत गाती हैं और झूला झूलने की परंपरा भी निभाती हैं।🙏
अगले दिन पारण की परंपरापूजा और कथा के बाद स्थानीय परंपरा एवं परिवार की धार्मिक मान्यता के अनुसार अगले दिन व्रत का पारण किया जाता है। निर्जला व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए पारण के समय पहले जल ग्रहण कर हल्का एवं सुपाच्य भोजन लेने की सलाह दी जाती है।गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बीमार व्यक्तियों या नियमित दवा लेने वालों को बिना चिकित्सकीय सलाह के निर्जला उपवास नहीं करना चाहिए।
🕉️ तीन प्रमुख तीज पर्वसावन और भाद्रपद के दौरान महिलाओं से जुड़े तीन प्रमुख तीज पर्व माने जाते हैं—हरियाली तीज, कजरी तीज और हरतालिका तीज।इनमें हरतालिका तीज विशेष रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना से जुड़ी है।
🌺 आस्था, प्रेम और सौहार्द का संदेशहरतालिका तीज का पर्व सच्ची श्रद्धा, विश्वास और संकल्प के महत्व का संदेश देता है। भगवान शिव और माता पार्वती का दांपत्य भारतीय संस्कृति में प्रेम, समानता, समर्पण और पारिवारिक सामंजस्य का आदर्श माना जाता है।हरतालिका तीज के पावन अवसर पर सभी माताओं, बहनों एवं सुहागिन महिलाओं को सुख, समृद्धि, सौभाग्य और अखंड दांपत्य जीवन की मंगलकामनाएं।















