
लखनऊ एल्डिको उद्यान-2 में अवैध रूप से लगाया गया गेट, हटाने की कोशिश करने पर शिकायतकर्ताओं पर ही हो गई FIR
लखनऊ। एल्डिको उद्यान-2, सेक्टर-3 के तिकोना पार्क के दोनों तरफ सड़क पर अवैध रूप से लगाए गए दो बड़े-बड़े गेटों को लेकर नगर निगम और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए हैं।शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि सार्वजनिक रास्ते पर बिना अनुमति लगाए गए दो गेटों को हटाने तथा तिकोने पार्क के अधिकांश निवासियों ने अपने मकान के किनारे सड़क को घेरकर बड़ी-बड़ी मजबूत रेलिंग लगाकर सड़क पर कब्जा करके उसमें बाग-बगीचा लगाए जाने तथा सड़क पर पंप लगाने जैसे कई अन्य अवैद्य निर्माण के कारण आवागमन में बाधा उत्पन्न हो गई है।
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उपरोक्त शिकायतों के लिए नगर निगम ने निरीक्षण किया, नोटिस जारी करने और कार्रवाई का आश्वासन भी दिया, लेकिन मामला आगे बढ़ने के बजाय कागजी कार्रवाई और पोर्टल की औपचारिकताओं में ही उलझा रहा।शिकायत में कहा गया है कि आईजीआरएस पर शिकायत दर्ज होने के बाद नगर निगम के जोन-8 के स्तर से स्थल का निरीक्षण किया गया।
अभिनेता नाना पाटेकर का निधननिरीक्षण में सड़क पर बिना अनुमति गेट लगाए जाने की बात सामने आने का दावा किया गया है। इसके बावजूद गेट हटाने की कार्रवाई तत्काल नहीं हुई। नगर निगम की ओर से संबंधित को नोटिस जारी करने और पुलिस बल उपलब्ध होने पर गेट हटाने की बात कही गई है।मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सरकारी निरीक्षण में सड़क पर बिना अनुमति गेट लगाए जाने की बात सामने आ गई थी, तो फिर गेट हटाने में इतनी देर क्यों हुई?
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कार्रवाई के नाम पर बार-बार वही पुरानी आख्या दोहराई जाती रही और वास्तविक समस्या जस की तस बनी रही।शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित दस्तावेजों और नोटिस की प्रतियां मांगने पर उन्हें शिकायतकर्ताओं को उपलब्ध नहीं कराया गया। इसके बाद गेट हटाने को लेकर विवाद और गहरा गया।
आरोप है कि जनता के आवागमन में बाधा बन रहे एक गेट को हटाने की कोशिश के बाद उलटे , आराधना, एल्डिकों निवासी सी. राम के विरुद्ध एफ़आईआर दर्ज हो गई। जबकि दूसरे गेट पर कोई कार्यवाही नहीं की गई। शिकायतकर्ताओं ने पुलिस से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की जाए और यह देखा जाए कि दो गेट किसकी अनुमति से लगाए गए थे, सड़क पर निर्माण की अनुमति थी या नहीं और नगर निगम की जांच रिपोर्ट के बावजूद कार्रवाई क्यों अटकी रही।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि आईजीआरएस पोर्टल पर समस्या के समाधान का दावा करने के बजाय जमीनी हकीकत में स्थानीय लोगों की परेशानी बनी रही। ऐसे में सवाल केवल गेट का नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था का है जिसमें शिकायत दर्ज होती है, निरीक्षण होता है, नोटिस की बात होती है और फिर भी सार्वजनिक रास्ते की समस्या लंबे समय तक जस की तास बनी रहती है।
अब इस पूरे मामले में नगर निगम की कार्रवाई, पुलिस की एफ़आईआर और सार्वजनिक सड़क पर लगाए गए गेट की वैधता तीनों की जांच अहम हो गई है। यदि गेट वास्तव में बिना अनुमति सार्वजनिक सड़क पर लगाया गया था, तो यह भी जांच का विषय है कि उसे हटाने की कार्रवाई के बजाय विवाद आखिर एफ़आईआर तक कैसे पहुंचा?अब मोहल्लेवासी नगर आयुक्त और नगर महापौर से मिलकर उनके समक्ष अपनी बात रखेंगे।












