
बड़ी ही श्रद्धा और आस्था के साथ गणपति बप्पा की होती हैं पूजा —
सुबह- शाम पंडाल में गणपति बप्पा मोरया के लगाए जाते जयकारे—
तेजीबाजार –चतुर्थी तिथि से अनंत चतुर्दशी तक चलने वाला गणेश पूजनोत्सव सोमवार से आरंभ हुआ हैं जिसमें क्षेत्र के विभिन्न गांवों में यहां तक की लगभग घर- घर में सुंदर पंडाल सजाकर उसमे भगवान गणेश जी की छोटी- बड़ी मूर्ति स्थापित कर भक्तगण अपने आराध्य की बड़ी ही विधि विधान के साथ पूजा पाठ कर नित सुबह शाम भगवान गणेश जी की आरती उतारते है
और गणपति बप्पा मोरया के जयकारे लगाकर पंडाल में प्रसाद का वितरण करते हैं।इसी कड़ी में क्षेत्र के दिलशादपुर, तेजीबाजार के पुरानी बाजार,
तारकेश्वरनाथ मंदिर, रामचन्द्रकापुरा, सुभाष चौक हनुमान मंदिर पर तथा गावों में घर- घर पंडाल को झालरों व पताको से बहुत ही सुंदर सजाकर भगवान गणेश जी की मूर्ति स्थापित कर ब्रह्मण पुरोहित पंडित जय प्रकाश मिश्र तथा वेदाकर मिश्र के सानिध्य में बड़े ही विधि विधान के साथ भक्तगण पूजा पाठ करते हैं और आरती भजन के बाद गणपति बप्पा मोरया के जयकारे लगाकर लोग भक्ति धुन पर नृत्य करते हुए भगवान गणेश जी से आशीर्वाद लेते हैं

इसके तत्पश्चात आयोजक द्वारा प्रसाद का वितरण किया जाता हैं।इस संबंध में पुरोहित पंडित जय प्रकाश मिश्र ने बताया कि क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर विनायक जी की प्रतिमा स्थापित हुई है कही सार्वजनिक रूप से तो कही स्वयं लोगों ने अपने घरों में स्थापित कर पूजा पाठ करते हैं वहीं इन्होंने बताया कि कुछ लोग तीन दिन के लिए तो कुछ पांच दिन के लिए और कुछ दस दिनों के लिए विनायक जी की मूर्ति स्थापित कर बड़े ही विधि- विधान और पूरे आध्यात्म के साथ सपरिवार पूजन करते हैं भगवान गणेश जी को मोदक, फल, फूल, चरणामृत आदि का भोग लगाते हैं और आपस में प्रसाद के रूप में वितरित करते हैं, अनंत चतुर्दशी के दिन हवन होती हैं और दूसरे दिन मूर्ति विसर्जन के साथ ही भंडारे का भी आयोजन किया जाता है। वहीं पंडाल में भक्ति गीतों की धुनों पर महिलाएं,पुरुष, बच्चे आदि बड़ी ही श्रद्धा के साथ नृत्य कर भगवान से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।पंडाल के संचालकर्ता संजय, राजकुमार ऊमर वैश्य, नितेश जायसवाल, शुभम मिश्रा, पंडित मुकेश मिश्रा, रवि ऊमर, देवेश ऊमर वैश्य ने बताया कि हम लोगों ने पांच दिनों के लिए भगवान गणेश जी की मूर्ति स्थापित किया हूँ रोज सुबह शाम भगवान की आरती पूजा कर जयकारे लगाए जाते है और पंडाल में महिलाएं एकत्रित होकर भक्ति गीत गाती हैं।















