
‘मोबाइल की माया’ के जरिए रघुकुल यथार्थ ने बच्चों और युवाओं को किया सावधान मोबाइल के बढ़ते दुरुपयोग पर जताई चिंता, अभिभावकों से बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण की अपील
वाराणसी। मोबाइल फोन आज की जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसके बढ़ते दुरुपयोग को लेकर रघुकुल यथार्थ ने अपनी कविता ‘मोबाइल की माया’ के माध्यम से बच्चों, युवाओं और अभिभावकों को जागरूक करने का प्रयास किया है।कविता में उन्होंने मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल से बच्चों के पढ़ाई, खेलकूद, पारिवारिक संबंधों और मानसिक एवं शारीरिक विकास पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को रेखांकित किया है। उन्होंने लिखा कि मोबाइल के कारण बच्चों की माता-पिता से दूरी बढ़ रही है और उनका काफी समय मोबाइल पर व्यतीत हो रहा है।रघुकुल यथार्थ ने अभिभावकों से सवाल किया कि मोबाइल का इस्तेमाल उनके बच्चों के भविष्य को निखारेगा या बिखेरेगा। उन्होंने बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल पर आवश्यक नियंत्रण रखने तथा उन्हें मैदान में खेलने, शारीरिक गतिविधियों और रचनात्मक कार्यों के लिए प्रेरित करने की बात कही।कविता में युवाओं के बीच मोबाइल के जरिए बिना पर्याप्त मेहनत के सफलता और पैसा हासिल करने की बढ़ती चाह पर भी चिंता व्यक्त की गई है। उन्होंने संदेश दिया कि सपनों को हकीकत में बदलने के लिए मेहनत और अनुशासन जरूरी है।कविता के अंत में उन्होंने मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल और दुरुपयोग पर रोक लगाने की अपील करते हुए अभिभावकों को समय रहते सचेत होने का संदेश दिया है।रघुकुल यथार्थपूर्व छात्र संघ अध्यक्ष प्र. (2022), वाराणसी, उत्तर प्रदेश















