श्रद्धा एवं विश्वास का सम्मिलन ही शिव—पार्वती का विवाह है: डा. मदन मोहन
घनश्यामपुर में आयोजित तीन दिवसीय श्रीराम कथा का हुआ समापन
बदलापुर, जौनपुर। महादेव शिव विश्वास के प्रतीक है तो पार्वती श्रद्धा की दोनों का सम्मिलन ही शिव पार्वती का विवाह है। उक्त बातें श्रीराम जानकी मंदिर पुरानी बाजार घनश्यामपुर में आयोजित तीन दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव में वाराणसी से पधारे मानस कोविद डा. मदन मोहन मिश्र ने विसर्जन दिवस पर कहा।उन्होंने शिव—पार्वती के विवाह की चर्चा करते हुये कहा कि जो अपमान में भी सम्मान की भावना देखता है, उसे देव नहीं, बल्कि महादेव कहा जाता है। शंकर जी विवाह करने जाते हैं। ससुराल हिमालय किन्तु देखते हैं। अपने घर कैलाश की तरफ इस कथा से संकेत मिलता है कि हम विवाह करने ससुराल जाय लेकिन परिवार को भूल न जाय। जो अपने को अमर बनाने के लिये अमृत पिया, वह केवल देव कहलाता है किन्तु लोक कल्याण के लिये जो हलाहल विष का पान करता है, वह देव नहीं, बल्कि महादेव कहलाता है। कथा पंडाल में पधारे सभी श्रोताओं का स्वागत प्रधान राम जियावन ने किया। इस अवसर पर सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।


